नई ट्रांसफर पॉलिसी या कर्मचारियों के लिए काला पानी की सजा? 2 साल से सीधे 5 साल! आखिर किसके फायदे के लिए बनी यह नीति?
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चक्रधरपुर रेल मंडल में जारी नई लोको रनिंग स्टाफ एवं सुपरवाइजर ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर कर्मचारियों के बीच भारी असंतोष देखने को मिल रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि पहले जहां ब्रांच लाइन में पोस्टिंग की अधिकतम अवधि 2 वर्ष मानी जाती थी, वहीं नई नीति के तहत अब कई कर्मचारियों को अपने मनचाहे स्टेशन तक पहुंचने के लिए 5 वर्ष तक इंतजार करना पड़ सकता है।
नई पॉलिसी के अनुसार नए ALP, LPG और सुपरवाइजरों की प्रारंभिक पोस्टिंग झारसुगुड़ा, सरडेगा, डीपीएस, जारोली और बंसपानी जैसी लॉबियों में की जाएगी। इसके बाद 2 वर्ष का लॉक-इन पीरियड पूरा करना अनिवार्य होगा।
विवाद की सबसे बड़ी वजह यह है कि टाटानगर, आदित्यपुर, राउरकेला और बॉन्डामुंडा जैसी प्रमुख लॉबियों में ट्रांसफर के लिए कर्मचारियों को अतिरिक्त 3 वर्ष का रेजिडेंसी पीरियड पूरा करना होगा। यानी कुल मिलाकर 5 साल का इंतजार।
कई कर्मचारियों का आरोप है कि पहले से मेन लाइन में कार्यरत कुछ लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा, जबकि वर्षों से ब्रांच लाइन में सेवा दे रहे कर्मचारियों के साथ यह व्यवस्था न्यायसंगत नहीं है।
इसके अलावा कर्मचारियों ने रिलीविंग ड्यूटी, HRA, म्यूचुअल ट्रांसफर और भविष्य में बनने वाली नई लॉबियों में पोस्टिंग को लेकर भी कई सवाल उठाए हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यह नई ट्रांसफर पॉलिसी सभी कर्मचारियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करेगी या फिर असमानता को और बढ़ाएगी?
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