सुंदरगढ़ से सामने आया है एक ऐसा मामला, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिसरा के सरकारी हिंदी उच्च प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ सहायक शिक्षिका इंदु राय की नियुक्ति और पहचान को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि पुलिस रिकॉर्ड में इसी महिला का नाम इंद्रावती मंडल दर्ज है।
सवाल सिर्फ नाम का नहीं है… सवाल है कि आखिर सरकारी नौकरी में पहचान से जुड़े दस्तावेजों की जांच कैसे हुई?
बताया जा रहा है कि मामले को लेकर 25 नवंबर 2025 को BEO बिसरा के समक्ष शिकायत की गई थी। लेकिन कार्रवाई आगे बढ़ने के बजाय मामला लंबे समय तक कागजों में ही उलझा रहा।
इसके बाद 12 मई 2026 को शिकायत जिला कलेक्टर तक पहुंची।
और यहीं से कहानी और भी गंभीर हो जाती है…
शिकायत के महज दो दिन बाद, 14 मई को जांच रिपोर्ट के जरिए मामले को बंद कर दिया गया।
अब शिकायतकर्ता ने इस जांच रिपोर्ट पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जिस बिंदु पर शिकायत की गई थी, उसी की निष्पक्ष जांच नहीं हुई।
6 अक्टूबर को एक बार फिर मामला जिला कलेक्टर के दरबार में पहुंचा है।
अब बड़ा सवाल यह है—
क्या पुलिस रिकॉर्ड और सरकारी नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों की दोबारा स्वतंत्र जांच होगी?
क्या इंदु राय और इंद्रावती मंडल के नाम से जुड़े रिकॉर्ड का सच सामने आएगा?
और सबसे बड़ा सवाल—
अगर पहली जांच में सब कुछ सही था, तो दोबारा शिकायत की नौबत क्यों आई?
इन सवालों के जवाब अब सुंदरगढ़ जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांगे जा रहे हैं।
“नाम अलग… रिकॉर्ड अलग… तो सच क्या है?”
R. संचार की पड़ताल जारी है।
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