चार FIR, एक बच्चा और कई सवाल! बंडामुंडा थाना जांच के घेरे में

पुलिस और राजकुमारी चौधरी यह अच्छे से जानती थी कि देवर पर झूठा आरोप लगा रही है।

 

फिरभी बार बार देवर पर बच्चे को छुपा कर रखने का आरोप‌ लगाकर मुकदमा दर्ज करवाती रही और पुलिस करता रहा।

 

राजकुमारी का I. A. और अखबार में छपी खबर ने खोली पोल।

 

कोर्ट में जिस बच्चे को लेकर चाइल्ड कस्टडी का केस चल रहा हो ,उसी बच्चे के अपहरण का मामला क्या थाना दर्ज कर सकता है?

 

पुलिस को पता ही नहीं की एफआईआर में किस बच्चे का जिक्र किया गया है।

 

बंडामुंडा थाने में दर्ज चार ऐसे एफआईआर पर एक ऐसा सवाल खडा़ हो गया है, जिसमें शिकायत दर्ज करने का आदेश देने वाले थाना अध्यक्ष, जांच अधिकारी और शिकायत दर्ज कराने वाली राजकुमारी चौधरी बूरी तरह से घिरती नजर आ रही है। कहने का अर्थ यह है कि अपने ही एफआईआर में फंस गए शिकायत कर्ता और थाना।

राजकुमारी चौधरी ने बंडामुंडा थाना में दिनांक 8/3/2021 को पहला एफआईआर 35/2021 दर्ज करवाया जिसमें उन्होंने यह आरोप लगाया कि उसके पति और दो देवरों ने उसे मारपीट कर उसके बेटे, गहने, और रूपये छीन लिए, जिसके बाद वह वह बार बार अपने देवर पर यह आरोप लगाती रही की उसके देवर ने उसके बेटे को छुपा कर उसके पैतृक आवास बिहार में रखा है, और अपने देवर पर बेटे को छुपाकर रखने का झूठा आरोप लगाकर बार बार मारपीट करती और पहुँच जाती बंडामुंडा‌ थाने और अपने देवर पर ही छेड़छाड़, बदसलूकी का झूठा आरोप लगाकर उसपर मुकदमा दर्ज करवाती और हर बार झगड़े का कारण बच्चे को ही बताती थी, राजकुमारी ने अपने एफआईआर में झगड़े का कारण बच्चे को ही बताई है। और पुलिस जांच में ही झगड़े का कारण बच्चे को ही बताई है। बच्चे को कारण बनाकर और देवर पर बच्चे को अपहरण करने का झूठा आरोप‌ लगा कर राजकुमारी चौधरी एक के बाद एक करके दो सालों में चार एफआईआर दर्ज करवाई, और कई बार जन सूनानी पोर्टल में और सोशलमीडिया में भी बच्चे के अपहरण करने का आरोप देवर पर लगाकर लोगों की सहानुभूति बटोरी और देवर को बदनाम किया।

पर राजकुमारी चौधरी द्वारा दिनांक 8/3/2021 को बंडामुंडा थाने में दर्ज कराया गया पहला एफआईआर, राजकुमारी चौधरी द्वारा परिवार न्यायालय में दिया गया आईए (I.A.) और जांच अधिकारी लखिंन्दर मुर्मू के हवाले से दैनिक जागरण अखबार में छपी खबर इस बात को साफ कर दिया की राजकुमारी और थाने की मिली भगत ने एक बेगुनाह को गुनाहगार बना दिया।

दैनिक जागरण में यह खबर छपी थी की राजकुमारी का पति प्रेमलाल अपने बेटे को लेकर लखनऊ फरार हो गया जिसे गिरफ्तार करने लखनऊ जाएगी पुलिस। खबर यह भी कहा गया था कि इसकी जानकारी जांच अधिकारी लखिंदर मुर्मू‌ ने अखबार को दी है।

इतना ही नहीं जुलाई 2021 से राजकुमारी चौधरी का अपने पति के साथ बेटे को लेकर चाइल्ड कस्टडी का मुकदमा भी चल रहा था। और राजकुमारी चौधरी के दो ही बच्चे है, एक बेटा और एक बेटी।

राजकुमारी चौधरी ने अपने I.A. के चौथे पैरा में यह कहा है कि उसके बेटे को उसका पति उसकी अनुपस्थिति में उसके घर से दिनांक 3/3/2021 को जबरन उठाकर ले गया।

अब देवर ने यहाँ सवाल खडा कर दिया है कि बेटी राजकुमारी के पास है, और दिनांक 3/3/2021 से बेटा अपने पिता के साथ है, तो राजकुमारी चौधरी ने दिनांक 8/3/2021 ,21/2/2022, 8/5/2022, में किस बच्चे को छुपाकर रखने का आरोप लगाकर मुझपर मुकदमा दर्ज किया गया है।

दूसरी ओर पुलिस ने पीडीत द्वारा बंडामुंडा थाने से मांगी गई आरटीआई में पुलिस इस बात की जानकारी नहीं दे पाई की उसपर किस बच्चे को छुपाकर रखने का आरोप लगाया जा रहा है।

 

इस घटना ने पुलिस की कार्यशैली पर भी प्रश्न खड़े कर दिए है कि जब थाने में पदस्थ हर एक पुलिस अधिकारी और खबर के माध्यम से स्थानीय‌ नागरिकों और अन्य पुलिस अधिकारियों को भी यह बात अच्छी तरह से पता था कि दोनों पति पत्नी के बीच बच्चे का विवाद है। बेटी मां के साथ और बेटा बाप के साथ रह रहा है, तो राजकुमारी के देवर पर किस बच्चे के अपहरण का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज किया गया है। इस बाबत पीडीत देवर ने एसपी राउरकेला को इसकी जांच के लिए आवेदन दिया है और एसपी राउरकेला‌ ने आवेदन को डीवाईएसपी जोन-2 को जांच के निर्देश दिए है। यह तो तय है कि बारीकी से जांच हुई तो राजकुमारी चौधरी के साथ कई पुलिस अधीकारी और झूठी गवाही देने वाले लोग नपेंगे।

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